Tuesday, March 29, 2011

बीमारी नहीं जाती


  
                                              
अजब है हाल अपना अपनी बीमारी नहीं जाती 
कि सब कुछ  छोड़ देने पर भी खुद्दारी नहीं जाती 

ये  उनका  काम  है  फिरकापरस्ती छोड़ दें कैसे 
वो कोशिश लाख कर लें उनकी ग़द्दारी नहीं जाती

वो बूढा शख्स अपनी जान तक नीलाम कर आया 
नहीं  मालूम  ऐसे  घर  की   दुशवारी नहीं जाती 

फ़क़त पानी पिला उसने सुलाया अपने बच्चों को 
वो आंसू रोक ले पर उसकी सिसकारी नहीं जाती 

उठाकर हाथ सरहद पे किसी ने लफ्ज़ दोहराया 
खुदाया क्या ग़ज़ब है क्यूँ ये बमबारी नहीं जाती 

कोई आये न आये हमको इससे क्या ग़रज़ साहिल 
मेरी फितरत मैं शामिल है ये गमख्वारी नहीं जाती 

                                                  साहिल इटावी

1 comment:

  1. sahil sahab ki ghazlon me zindagi ki sachchi jhalakti hai. inki soch aur salahiyat insan ko behtari ki taraf le jati hai.
    thnx
    behtar peshkash

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