Tuesday, February 15, 2011

अब मुझे अच्छा नहीं लगता


किसी   को   यूँ   डराना   अब मुझे अच्छा नहीं लगता
तुम्हारा   मुस्कुराना  अब  मुझे   अच्छा  नहीं लगता

ज़हन में कुछ ज़बाँ पे  कुछ अजब दिल की रवादारी
तुम्हारा मुँह चुराना अब मुझे अच्छा नहीं लगता

जिन्होंने मुल्क को आज़ादी की रह पर चलाया है
निशाँ उनके मिटाना अब मुझे अच्छा नहीं लगता

भरम   पाले हैं   शायद  कोई     उनके काम आ जाए
भरम उनका मिटाना अब मुझे अच्छा नहीं लगता

फ़सल दहकाँ की अपने नाम कर जो घर में बैठे हैं
वो उनका आशियाना अब मुझे अच्छा नहीं लगता

निवाला जिसमें लिपटा हो किसी का खून ए साहिल
वो ऐसा आब-ओ-दाना अब मुझे अच्छा नहीं लगता

                                                                       साहिल इटावी 




4 comments:

  1. kafi behtar likha hai aapne hazrat.
    shukriya

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  2. bahut khoob........aap aise hi masumiyat se likte rahiye .. jaldi hi kuch karisma hoga

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  3. जिसकी धुन पर दुनिया नाचे दिल ऐसा एकतारा है
    जो तुमको भी प्यारा है और जो हमको भी प्यारा है
    झूम रही है सारी दुनिया ,जब की हमारे गीतों पर
    तब कहती हो प्यार हुआ है क्या अहसान तुम्हारा है

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