किसी को यूँ डराना अब मुझे अच्छा नहीं लगता
तुम्हारा मुस्कुराना अब मुझे अच्छा नहीं लगता
ज़हन में कुछ ज़बाँ पे कुछ अजब दिल की रवादारी
तुम्हारा मुँह चुराना अब मुझे अच्छा नहीं लगता
जिन्होंने मुल्क को आज़ादी की रह पर चलाया है
निशाँ उनके मिटाना अब मुझे अच्छा नहीं लगता
भरम पाले हैं शायद कोई उनके काम आ जाए
भरम उनका मिटाना अब मुझे अच्छा नहीं लगता
फ़सल दहकाँ की अपने नाम कर जो घर में बैठे हैं
वो उनका आशियाना अब मुझे अच्छा नहीं लगता
निवाला जिसमें लिपटा हो किसी का खून ए साहिल
वो ऐसा आब-ओ-दाना अब मुझे अच्छा नहीं लगता
साहिल इटावी

kafi behtar likha hai aapne hazrat.
ReplyDeleteshukriya
bahut khoob........aap aise hi masumiyat se likte rahiye .. jaldi hi kuch karisma hoga
ReplyDeleteजिसकी धुन पर दुनिया नाचे दिल ऐसा एकतारा है
ReplyDeleteजो तुमको भी प्यारा है और जो हमको भी प्यारा है
झूम रही है सारी दुनिया ,जब की हमारे गीतों पर
तब कहती हो प्यार हुआ है क्या अहसान तुम्हारा है
bahut khoob sir ji
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